आज
सुबह शर्मा जी मिल गए. मंडी से लौट रहे थे . चेहरे से रौनक गायब थी. जबसे
प्याज ने आँखें दिखानी शुरू की तब से पहली बार शर्मा जी के चेहरे पर उदासी
देखी.दरअसल शर्मा जी प्याज के दाम बढ़ने से बड़े खुश थे. हमको रोज़ चिढ़ाते थे.
और खाओ लहसून प्याज़. आज उनकी उड़ी हुई रंगत को देख मुझे लगा प्याज सस्ता हो
गया. पूछ बैठा, शर्मा जी मंडी से खाली झोला क्यों ला रहे हो . आज आलू बैगन
का भरता नहीं बनेगा क्या. सुनते ही शर्मा की लंका लग गई. फिर न मनमोहन बचे
न मुलायम. पता चला की आलू 40 रूपये किलो हो गया.